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à¤à¤¡à¥€à¤®à¤¾ (सूजन) : गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के छठे महीने के आसपास, आपको पैरों, टखनों और हाथों पर सूजन दिखाई दे सकती है। इसे à¤à¤¡à¥€à¤®à¤¾ कहा जाता है। à¤à¤¸à¤¾ इसलिठहोता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि शरीर में टिशà¥à¤¯à¥‚ के à¤à¥€à¤¤à¤° तरल पदारà¥à¤¥ बनना शà¥à¤°à¥‚ होता है, ताकि आपको और आपके बचà¥à¤šà¥‡ को पोषण मिल सके। शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ पर दबाव में वृदà¥à¤§à¤¿ और à¤à¤¡à¤¼à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, पैरों व हाथों में सूजन à¤à¤¡à¥€à¤®à¤¾ के कारण ही होती है। हलà¥à¤•ी-सी सूजन सामानà¥à¤¯ है और यह गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ à¤à¤• आम लकà¥à¤·à¤£ है ।
अपच की समसà¥à¤¯à¤¾ : गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौराना कबà¥à¤œ होना à¤à¤• आम समसà¥à¤¯à¤¾ है। आपको बता दें कि गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ बढ़ने के कारण पेट के निचले à¤à¤¾à¤— पर दबाव पड़ता है और अपच की समसà¥à¤¯à¤¾ होने लगती है। इस समसà¥à¤¯à¤¾ से बचने के लिठफाइबर यà¥à¤•à¥à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ के साथ-साथ à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में पानी पीना चाहिà¤à¥¤ अगर तब à¤à¥€ कबà¥à¤œ ठीक नहीं होती है, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° दवाइयां देते हैं, जिसे थोड़े समय के लिठलेना ही बेहतर होता है ।
जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ à¤à¥‚ख लगना : बचà¥à¤šà¥‡ के विकास में पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की ज़रूरत होती है। यही कारण है कि आपको सामानà¥à¤¯ से अधिक à¤à¥‚ख लगती है। आप अकà¥à¤¸à¤° à¤à¥‚ख महसूस होगी। संà¤à¤µ है कि इस दौरान आपका जंक फूड खाने का दिल करे, लेकिन खà¥à¤¦ पर नियंतà¥à¤°à¤£ रखें और à¤à¤¸à¤¾ à¤à¥‹à¤œà¤¨ करें, जो आपके व आपके शिशॠके लिठफ़ायदेमंद हो।
खरà¥à¤°à¤¾à¤Ÿà¥‡ आना : यह गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के आम लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• है। वजन बढ़ना à¤à¥€ खरà¥à¤°à¤¾à¤Ÿà¥‹à¤‚ का कारण हो सकता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि सिर और गरà¥à¤¦à¤¨ के चारों ओर टिशà¥à¤¯à¥‚ सूख जाते हैं, जिससे खरà¥à¤°à¤¾à¤Ÿà¥‹à¤‚ की समसà¥à¤¯à¤¾ शà¥à¤°à¥‚ होती है। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान, कà¥à¤› मामलों में खरà¥à¤°à¤¾à¤Ÿà¥‡ मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ का संकेत हो सकते हैं, जिसके बारे में डॉकà¥à¤Ÿà¤° मासिक रकà¥à¤¤ और मूतà¥à¤° परीकà¥à¤·à¤£ से पता लगा सकते हैं (3)।
पीठदरà¥à¤¦ की समसà¥à¤¯à¤¾ : यह गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के सबसे आम लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• है। पà¥à¤°à¤¸à¤µ के लिठशरीर को तैयार करने के लिठहारà¥à¤®à¥‹à¤¨, शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° और मांसपेशियों को ढीला करते हैं। बचà¥à¤šà¥‡ का वजन और बढ़ता गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯, आपके पेट को आगे बढ़ाता है, जिस कारण पीठमें दरà¥à¤¦ की समसà¥à¤¯à¤¾ होती है।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के छठे महीने में शरीर में होने वाले बदलाव
अà¤à¥€ तक आपका काफी वजन बढ़ गया होगा। इस दौरान गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ आमतौर पर पेट के ऊपर à¤à¤• इंच या उससे अधिक तक बढ़ता है। इसके कारण आपकी नाà¤à¤¿ बाहर की ओर निकली हà¥à¤ˆ दिखने लगती है। डिलीवरी के बाद कà¥à¤› हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ तक यह इस तरह बनी रहती है, लेकिन कà¥à¤› समय बाद में यह अपनी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में वापस आ जाती है। हर महिला के शरीर अनà¥à¤ªà¤¾à¤¤ के कारण नाà¤à¤¿ का बाहर की ओर निकलना देर से पता चल सकता है।
छठे महीने में मसूड़ों से खून आने की समसà¥à¤¯à¤¾ बनी रहती है। अगर यह समसà¥à¤¯à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो, तो अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• जरूर करें ।
गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ बढ़ने से पेट के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में खिंचाव होने लगता है। इस वजह से उस à¤à¤¾à¤— में खिंचाव के निशान पड़ सकते हैं, जिस वजह से आपको असहजता महसूस हो सकती है।
हो सकता है कि आपको नकली लेबर पेन (बà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤¸à¤Ÿà¤¨ हिकà¥à¤¸ संकà¥à¤šà¤¨) होने लगे। ये थोड़ी-थोड़ी देर में 30 सेकंड से लेकर à¤à¤• मिनट तक रहने वाले संकà¥à¤šà¤¨ हैं। हालांकि, इस तरह के पेन जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° तीसरी तिमाही में होते हैं (6)। अगर तेज दरà¥à¤¦ उठे या फिर निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ समयावधि से रà¥à¤•-रà¥à¤• कर हलà¥à¤•ा दरà¥à¤¦ हो, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह लें।
इस दौरान, शिशॠतक परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ पोषण पहà¥à¤‚चाने के लिठरकà¥à¤¤ की तेज आपूरà¥à¤¤à¤¿ होती है। इस कारण, कà¤à¥€-कà¤à¥€ गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡, जैसे पेट के नीचे और जांघों पर नसें उà¤à¤° आ (वैरिकोस वेन) सकती हैं।
बढ़ते रकà¥à¤¤ संचार के कारण हाथ-पैरों पर पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ सकता है, जिस वजह से हाथ-पैरों में कड़ापन आ सकता है।
आगे आप जानेंगे कि गरà¥à¤ में 6 महीने के बचà¥à¤šà¥‡ का वजन कितना होता है।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के छठे महीने में बचà¥à¤šà¥‡ का विकास और
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